Monday, 27 February 2023

❤️ प्यार से विवाह तक का सफर

❤️ प्यार से शादी तक का सफर



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प्यार से शादी तक का सफर इतना लंबा होगा उन्होंने सोचा न था।

दो युवा समूहों ने जीवन के सपने संजोने शुरू कर दिए थे लेकिन इंतजार की घड़ियां बढ़ती ही जा रही थीं।

मैं गुमसुम और उदास देख कर मां ने कहा, ''क्या बात है, रति, तू इस तरह मुंह लटकाए क्यों बैठी है? कई दिन से मनोज का भी कोई फोन नहीं आया। दोनों ने आपस में साम कर लिया क्या?''

'नहीं मां, रोज रोज क्या बात करें।

कितने दिनों से शादी की तैयारी कर रहे थे, सब बनने वाली थीं। यदि मनोज के दादाजी की मौत नहीं हुई तो आज तेरी शादी को 15 दिन हो गए। वह काफी बड़े थे। तेरहवीं के बाद शादी हो सकती है, तेरे सुसुराल वाले बड़े दकियानूसी विचार के हैं। कहते हैं कि साए नहीं हैं। अब तो 5-6 महीने बाद ही होगी शादी।

हमारी तो सब तैयारी पूरी हो गई। शादी के कार्ड के टुकड़े थे। फैंटेसी हाल को, कैटरर्स को, अलंकरण करने वालों को, और कई लोगों को एडवांस कर चुके थे। 6 महीने की शादी से अच्छाखासा नुकसान हो गया है।

इसी बात से तो मनोज बहुत विचलित है, मां. पर कुछ कह नहीं पाता बेटा, हम भी कभी तुम्हारी उम्र के थे। तुम दोनों के समझ को समझ सकते हैं, पर हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। मैंने तो तीस सास से कहा था कि साए नहीं हैं तो क्या हुआ, अच्छे काम के लिए हर दिन शुभ होते हैं... अब हमें शादी कर लेनी चाहिए।

मेरा इतना कहना था कि वह भड़क गए और कहने लगीं, आप के लिए हर दिन शुभ होते हैं पर हम तो सायों में भरोसा करते हैं। हमारा इकलौता बेटा है, हम अपनी तरफ से पुरानी नागरिकता को अनदेखा कर मन में कोई वहम पैदा नहीं करना चाहते।

रति सोचने लगी कि माता इससे ज्यादा क्या कर सकते हैं और मैं भी क्या खाता हूं, यात्रियों को कैसे बताएं कि मनोज क्या चाहता है।

नर्सरी से इंटर तक हम दोनों साथसाथ पढ़े थे । किंतु दोस्ती इंटर में आने के बाद ही हुई थी । इंटर के बाद मनोज इंजीनियरिंग करने चला गया और मैं ने बी.एससी. में दाखिला ले लिया था । कालिज अलग होने पर भी हम दोनों छुट्टियों में कुछ समय साथ बिताते थे । बीच में फोन पर बातचीत भी कर लेते थे । कंप्यूटर पर चैट हो जाती थी ।

एम.एससी. में आते ही मम्मीपापा ने शादी के लिए लड़का तलाशने की शुरुआत कर दी मैं ने कहा भी कि मम्मी, एम.एससी. के बाद शादी करना पर उन का कहना था कि तुम अपनी पढ़ाई जारी रखो, शादी कौन सी अभी हुई जा रही है, अच्छा लड़का मिलने में भी समय लगता है ।

शादी की चर्चा शुरू होते ही मनोज की छवि मेरी आंखों में तैर गई थी । यों हम दोनों एक अच्छे मित्र थे पर तब तक शादी करने के वादे हम दोनों ने एकदूसरे से नहीं किए थे । साथ मिल कर भविष्य के सपने भी नहीं देखे थे पर मम्मी द्वारा शादी की चर्चा करने पर मनोज का खयाल आना, क्या इसे प्यार समझूं. क्या मनोज भी यही चाहता है, कैसे जानूं उस के दिल की बात ।

मुलाकात में मनोज से मम्मी द्वारा शादी की पेशकश के बारे में बताया तो वह बोला, ‘‘इतनी जल्दी शादी कर लोगी, अभी तो तुम्हें 2 वर्ष एम.एससी. करने में ही लगेंगे,’’ फिर कुछ सोचते हुए बोला था, ‘‘सीधेसीधे बताओ, क्या मुझ से शादी करोगी…पर अभी मुझे सैटिल होने में कम से कम 2-3 वर्ष लगेंगे ।

प्रसन्नता की एक लहर तनमन को छू गई थी, ‘‘सच कहूं मनोज, जब मम्मी ने शादी की बात की तो एकदम से मुझे तुम याद आ गए थे…क्या यही प्यार है?’’

मैं समझता हूं यही प्यार है देखो, जो बात अब तक नहीं कह सका था, तुम्हारी शादी की बात उठते ही मेरे मुंह पर आ गई और मैं ने तुम्हें प्रपोज कर डाला ।

अब जब हम दोनों एकदूसरे से चाहत का इजहार कर ही चुके हैं तो फिर इस विषय में गंभीरता से सोचना होगा ।

सोचना ही नहीं होगा रति, तुम्हें अपने मम्मीपापा को इस शादी के लिए मनाना भी होगा ।

‘‘क्या तुम्हारे घर वाले मान जाएंगे?’’

देखो, अभी तो मेरा इंजीनियरिंग का अंतिम साल है । मेरी कैट की कोचिंग भी चल रही है…उस की भी परीक्षा देनी है । वैसे हो सकता है इस साल किसी अच्छी कंपनी में प्लेसमेंट मिल जाए क्योंकि कालिज में बहुत सी कंपनियां आती हैं और जौब आफर करती है । अच्छा आफर मिला तो मैं स्वीकार कर लूंगा और जैसे ही शादी की चर्चा शुरू होगी मैं तुम्हारे बारे में बता दूंगा ।

प्यार का अंकुर तो हमारे बीच पनप ही चुका था और हमारा यह प्यार अब जीवनसाथी बनने के सपने भी देखने लगा था । अब इस का जिक्र अपनेअपने घर में करना जरूरी हो गया था ।मैं ने मम्मी को मनोज के बारे में बताया तो वह बोलीं, ‘‘वह अपनी जाति का नहीं है…यह कैसे हो सकता है, तेरे पापा तो बिलकुल नहीं मानेंगे क्या मनोज के मातापिता तैयार हैं?’’साथसाथ भविष्य के सपने भी बुनते रहे हैं किंतु मनोज को कभी इस तरह कमजोर होते नहीं देखा । यद्यपि उस का बस चलता तो मंगनी के दूसरे दिन ही वह शादी कर लेता पर मेरा फाइनल साल था इसलिए वह मन मसोस कर रह गय ।

प्रतीक्षा की लंबी घडि़यां हम कभी मिल कर, कभी फोन पर बात कर के काटते रहे । हम दोनों बेताबी से शादी के दिन का इंतजार करते रहे. दूरी सहन नहीं होती थी । साथ रहने व एक हो जाने की इच्छा बलवती होती जाती थी. । जैसे-जैसे समय बीत रहा था, सपनों के रंगीन समुंदर में गोते लगाते दिन मंजिल की तरफ बढ़ते जा रहे थे । शादी के 10 दिन पहले हम ने मिलना भी बंद कर दिया था कि अब एकदूसरे को दूल्हादुलहन के रूप में ही देखेंगे पर विवाह के 7 दिन पहले बाबाजी की मौत हमारे सपनों के महल को धराशायी कर गई ।कानून की मुहर लग गई है । रति अब तुम्हारी हुई ।’’

‘‘ऐ जमाई बाबू, ये इंडिया है, वह तो वीजा के लिए यह सब करना पड़ा है वरना इसे हम शादी नहीं मानते । हमारे घर की बहू तो रति विवाह संस्कार के बाद ही बनेगी,’’ मेरी मम्मी ने कहा ।

‘‘वह तो मजाक की बात थी, मम्मी, अब आप लोग घर चलें । मैं तो इन दोनों से पार्टी ले कर ही आऊंगा ।’’

होटल में खाने का आर्डर देने के बाद मनोज ने अपने जीजाजी से पूछा, ''जीजाजी, मम्मी तक हमारी फरियाद अभी तक पहुंच या नहीं?''

''साले साहब, क्यों चिंता करते हो। हम दोनों न तुम्हारे साथ हैं। अमेरिका आप दोनों साथ ही जाएंगे। मैंने अभी बात नहीं की है, मैं आप की इस कोर्ट मैरिज का इंतजार कर रहा हूं। आगे मम्मी को मनाने की जिम्मेदारी आप की बहन ने ली है। इस से भी बात नहीं बनी तो फिर मैं कमान संभालूंगा''

''हाँ, भैया, मैं माँ को समझाने की पूरी कोशिश करूँगा। ''

हां, तू कोशिश कर ले, न माने तो मेरा नाम ले कर कह देना, 'तुम अब शादी करो या न करो भैया भाभी को साथ ले कर ही जाएंगे।

''वाह भैया, आज तुम बहुत बड़े हो गए हो।''

''आफ्टर आल अब मैं एक पत्नी का पति हो गया हूं।''

''ओके, भैया, अब हम लोग चलेंगे, आप लोगों का क्या प्रोग्राम है?''

''कुछ देर के दायरे में कर पहले रति को उसी के घर देंगे फिर अपना घर दिया।''

मेरे गले में हाथ डालकर मनोज ने शेरारत से देखा, ''हां, रति, अब क्या कहता है, तुम्हारा संस्कार मुझे पति को पसंद करते हैं या नहीं?''

आंखें नचाते हुए मैं छकी, ''अब तुम नांटी परसेंट मेरे पति हो।''यानी टैन परसेंट की अब भी कमी रह गई है...अभी और इंतजार करना पडे़गा?''

''उस दिन का मुझे अफसोस है शॉट...पर अब मैं तुम्हें देख रहा हूं। 


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